परहित सरिस धरम नहिं भाई ।पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।
भितरवार में श्री जानकी बल्लभ शास्त्री जी के पिताजी के पटा भोज कार्यक्रम में सम्मिलित हुआ