परहित सरिस धरम नहिं भाई ।पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।
शिवपुरी में श्री वाशिद अली जी के कार्यालय पर आत्मीय भेंट कर महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की