परहित सरिस धरम नहिं भाई ।
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ।।
केशर टॉवर मॉल में विधानसभा भितरवार क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के 179 दायित्ववान कार्यकर्ताओं एवं जनसेवकों बंधुओं के साथ साबरमती रिपोर्टर फिल्म के माध्यम से गोधरा साज़िश को वे नकाब होते देखा होगा। इस फिल्म के माध्यम से 2002 में साबरमती में हुए दर्दनाक रेल हादसे से जनता को तथ्यों के साथ अवगत कराया गया है। साबरमती फिल्म प्रत्येक भारतीय के लिए अवश्य देखने योग्य है। यह फिल्म देखने के बाद हर किसी को यह समझ में आएगा कि किस प्रकार मीडिया मित्रों के साथ षड्यंत्र रचकर कुछ विशेष राजनैतिक विरोधी नेताओं ने भाजपा नेतृत्व को बदनाम करने के लिए, पूरे देश को दंगे की आग में धकेल दिया। 2002 के साबरमती ट्रेन कांड की घटना भारत के इतिहास में एक बेहद दर्दनाक और विवादास्पद अध्याय है। यह घटना 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा स्टेशन के पास घटी, जब साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे (कोच एस-6) में आग लगा दी गई। इस हादसे में 59 लोग, जिनमें ज्यादातर अयोध्या से लौट रहे कारसेवक की मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे, जिसमें हजारों लोगों की जान गई और व्यापक तबाही हुई। यह घटना और इसके बाद हुई हिंसा आज भी भारतीय राजनीति और समाज में गहरे प्रभाव छोड़ती है। यह फिल्म "THE साबरमती रिपोर्टर" में इन घटनाओं को चित्रित किया गया है कि यह फिल्म न केवल उस समय की त्रासदी को समझने का प्रयास है, बल्कि इसके पीछे की सच्चाई और षड्यंत्रों पर भी प्रकाश डालती हैं। इस प्रकार की फिल्में दर्शकों को उस समय की घटनाओं के संदर्भ में सोचने और समझने का मौका देती हैं। यह फिल्म देशभक्ति, सच्चाई और इतिहास को समझने का एक माध्यम है। आप भी इसे अवश्य देखें । और देख कर भाजपा कार्यकर्ता हकीकत से जनता को अवगत कराएं